Crude OilPrices increse: ईरान-अमेरिका तनाव से तेल में उबाल

Navya Nair
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड बुधवार को 3.4 फीसदी तक चढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया और जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर का स्तर पार किया। 10 सितंबर को भी ब्रेंट करीब 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। बाजार में सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही प्रभावित होने को लेकर बनी हुई है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष से सप्लाई का डर
तेल बाजार में तेजी के पीछे मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और समुद्री रास्तों से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा है। रॉयटर्स के मुताबिक, होर्मुज से तेल और गैस का प्रवाह युद्ध से पहले वैश्विक आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा था, लेकिन संघर्ष के कारण इसमें बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी और ईरानी पक्षों के बीच जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमत में भू-राजनीतिक जोखिम का प्रीमियम जुड़ गया है।
भारत पर बढ़ सकता है आयात बिल का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की कच्चे तेल की आयात निर्भरता करीब 88.7 फीसदी रही। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश का तेल आयात बिल बढ़ सकता है और चालू खाते तथा रुपये पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि इसका वास्तविक असर कीमतों, विनिमय दर और घरेलू नीतिगत फैसलों पर भी निर्भर करेगा।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर से ऊपर पहुंचे क्रूड का असर भारतीय तेल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार घरेलू पंप कीमतों में बदलाव नहीं होने के बावजूद तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर मार्जिन का दबाव झेलना पड़ रहा है। इसलिए यदि वैश्विक कच्चा तेल लंबे समय तक इसी ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी को तय मानना उचित नहीं होगा।
OPEC+ ने अक्टूबर की नीति नहीं बदली
तेल की बढ़ती कीमतों के बीच OPEC+ की 6 सितंबर की बैठक में अक्टूबर के लिए मौजूदा उत्पादन नीति को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, समूह की अगली बैठक 4 अक्टूबर को होगी और इस साल के अंत तक उत्पादन में आगे बदलाव को लेकर चर्चा बाद में हो सकती है। ऐसे में फिलहाल बाजार की नजर OPEC+ से ज्यादा मध्य पूर्व में वास्तविक आपूर्ति और समुद्री परिवहन की स्थिति पर है।
आगे भी जारी रह सकती है तेल बाजार में अस्थिरता
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज क्षेत्र में समुद्री परिवहन पर इसका असर कितने समय तक बना रहता है। रॉयटर्स के मुताबिक, तेल की कीमतें शुरुआती अगस्त के स्तर से करीब 30 फीसदी तक ऊपर आ चुकी हैं और वैश्विक भंडार पर भी दबाव बढ़ रहा है। यदि आपूर्ति बाधित रहने की अवधि लंबी होती है तो महंगे तेल का असर महंगाई, परिवहन और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार में तेजी के साथ भारी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।








