SC on Pregnancy Termination: पति-पत्नी का झगड़ा गर्भपात का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

पति-पत्नी का झगड़ा गर्भपात का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
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Anjali Patil

Anjali Patil

0 सेकंड पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Harsh Pandya

Harsh Pandya

14 मिनट पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Rohan Desai

Rohan Desai

1 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Krishna Yadav

Krishna Yadav

3 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Trapti Tanwar

Trapti Tanwar

5 घंटे पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

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सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने से अधिक की गर्भावस्था समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक कलह अपने आप में गर्भपात का आधार नहीं हो सकती। अदालत ने इस मामले में अजन्मे बच्चे के अधिकारों और पिता की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

 

महिला ने गर्भावस्था समाप्त करने की मांगी अनुमति
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक महिला ने छह महीने से अधिक की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी है। महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दुर्व्यवहार और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि वह इस गर्भावस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।

वहीं, महिला के पति ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अजन्मे बच्चे पर उसका भी अधिकार है। पति ने अदालत से गर्भपात की अनुमति नहीं देने का अनुरोध किया।

 

सिर्फ वैवाहिक विवाद गर्भपात का आधार नहीं
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि बलात्कार या यौन उत्पीड़न के मामलों में अथवा भ्रूण में किसी तरह की समस्या होने पर गर्भपात की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा मामला अलग है।

अदालत ने सवाल उठाया कि यदि कोई महिला केवल पति और ससुराल वालों के खराब व्यवहार या प्रताड़ना के कारण गर्भपात कराना चाहती है, तो इसे किस तरह देखा जाना चाहिए और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

पति-पत्नी के झगड़े पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान पीठ ने महिला को समझाते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें और विवाद होना आम बात है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल इस आधार पर गर्भावस्था समाप्त कर दी जाए।

अदालत ने यह भी कहा कि यह यौन उत्पीड़न का मामला नहीं है और न ही किसी अकेली महिला के गर्भवती होने का मामला है। पीठ ने सवाल किया कि पति और ससुराल वालों के साथ विवाद के कारण गर्भपात की मांग किए जाने पर समाज किस दिशा में जाएगा और पिता के अधिकारों का क्या होगा?

 

महिला ने कोर्ट से कहा, गर्भावस्था नहीं बढ़ाना चाहती
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता महिला से वर्चुअल माध्यम से बातचीत की। इस दौरान महिला ने स्पष्ट किया कि वह गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती और अपने पति से तलाक लेना चाहती है।

 

पति ने बच्चे की जिम्मेदारी लेने की कही बात
दूसरी ओर, पति ने अदालत को बताया कि बच्चे के जन्म के बाद वह उसकी पूरी जिम्मेदारी लेने और देखभाल करने के लिए तैयार है। इसी आधार पर उसने कोर्ट से गर्भपात की अनुमति नहीं देने की मांग की।

 

पत्नी पर लगाए आरोप वापस लेने की सलाह
मामले में विवाद की मुख्य वजह पत्नी के चरित्र को लेकर पति की ओर से लगाए गए आरोप बताए गए। इस पर पीठ ने पति से कहा कि यदि वह वैवाहिक संबंधों में सुलह की दिशा में पहला कदम उठाना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अदालत में हलफनामा दाखिल कर पत्नी पर लगाए गए सभी आरोप वापस लेने होंगे।

 

बुधवार को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए बुधवार की तारीख तय की है। अब अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान महिला की गर्भावस्था समाप्त करने की मांग और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

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Anjali Patil

Anjali Patil

0 सेकंड पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Harsh Pandya

Harsh Pandya

14 मिनट पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Rohan Desai

Rohan Desai

1 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Krishna Yadav

Krishna Yadav

3 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Trapti Tanwar

Trapti Tanwar

5 घंटे पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

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