सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: 19वें दिन कोर्ट का हस्तक्षेप, सोनम वांगचुक की जान बचाने पर जोर

Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Monika Das
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की प्रतिदिन मेडिकल जांच कराई जाए। अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन सर्वोपरि है और सरकार की जिम्मेदारी है कि आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य की नियमित निगरानी से किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सकेगा।
जबरन खाना खिलाने से कोर्ट का इनकार
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित है। इसलिए अदालत ने सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती करने या फोर्स-फीडिंग (जबरन भोजन कराने) का आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि यदि स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ता है तो तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाए।
19वें दिन भी जारी है भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गई। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उनका वजन लगातार घटा है और कमजोरी बढ़ती जा रही है। डॉक्टर नियमित रूप से उनके ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और अन्य स्वास्थ्य मानकों की निगरानी कर रहे हैं। इसके बावजूद वांगचुक ने कहा है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं आंदोलन की मुख्य मांगें?
यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में चल रहा है। वांगचुक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सरकार ने कोर्ट को दिया भरोसा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकारी डॉक्टरों की टीम पहले से ही सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार ने आश्वासन दिया कि यदि स्वास्थ्य में किसी प्रकार की गंभीर गिरावट आती है तो तुरंत आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
सोनम वांगचुक के आंदोलन को देशभर के कई छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है। समर्थकों ने 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद मार्च' में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। माना जा रहा है कि आगामी संसद सत्र में भी NEET परीक्षा सुधार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं, जिससे यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक राजनीतिक व सामाजिक महत्व हासिल कर सकता है।








