₹5 लाख में खरीदा गया NEET का केमिस्ट्री पेपर: NEET पेपर लीक में CBI का बड़ा खुलासा

Simran Arora
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले में विशेष अदालत के समक्ष एक बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर स्थित 'रेनुकाई केमिस्ट्री क्लासेस' (RCC) के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने कथित रूप से ₹5 लाख की रिश्वत देकर परीक्षा से पहले केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र हासिल किया। CBI का दावा है कि यह मामला देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता से जुड़ा गंभीर अपराध है।
NTA पैनल सदस्य पर लीक कराने का आरोप
जांच के अनुसार, प्रश्नपत्र कथित रूप से NTA के पैनल सदस्य और केमिस्ट्री विषय के पेपर सेटर पी. वी. कुलकर्णी से प्राप्त किया गया। CBI का कहना है कि कुलकर्णी परीक्षा के प्रश्न तैयार करने वाली टीम का हिस्सा थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी मोटेगांवकर का बेटा कुलकर्णी की पुणे स्थित कोचिंग में पढ़ता था, जिसके माध्यम से दोनों के बीच संपर्क स्थापित हुआ और कथित सौदे को अंजाम दिया गया।
मोबाइल से मिले 132 सवाल, 111 निकले हूबहू मैच
CBI की छापेमारी के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से हाथ से लिखे 132 प्रश्नों की 36 तस्वीरें बरामद की गईं। फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच में पाया गया कि इनमें से 111 प्रश्न NTA के मास्टर प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते हैं। एजेंसी के अनुसार, यह प्रश्नपत्र परीक्षा से लगभग 10 दिन पहले यानी अप्रैल में ही आरोपियों तक पहुंच चुका था, जिससे पेपर लीक की आशंका को मजबूत आधार मिला।
'स्पेशल मेंटरिंग' के नाम पर छात्रों को कराई जाती थी तैयारी
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी अपनी कोचिंग में पढ़ने वाले कुछ चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से पहले विशेष बैच में बुलाता था। इन्हें 'वन-ऑन-वन मेंटरिंग' या 'स्पेशल मेंटरिंग' के नाम पर कथित रूप से वही प्रश्न और उनके उत्तर याद कराए जाते थे, जो बाद में परीक्षा में पूछे गए। CBI इस पूरे मॉडस ऑपरेंडी की जांच कर रही है कि कितने छात्रों को इसका लाभ मिला और नेटवर्क कितना व्यापक था।
संपत्ति और नेटवर्क की भी जांच जारी
CBI ने अदालत में दावा किया कि आरोपी शिवराज मोटेगांवकर की संपत्ति का आकार भी जांच के दायरे में है। एजेंसी के अनुसार, कभी पार्ट-टाइम शिक्षक रहे आरोपी ने वर्षों में बड़ी आर्थिक संपत्ति खड़ी की, जिसकी जांच की जा रही है। अदालत में जमानत का विरोध करते हुए CBI ने कहा कि यह मामला लाखों छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है।
जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना
CBI का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस कथित पेपर लीक नेटवर्क में NTA से जुड़े अन्य लोग, कोचिंग संस्थान या बिचौलिये भी शामिल थे। आने वाले दिनों में डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।








