यूपी में 47 हजार करोड़ की एक्सप्रेसवे क्रांति: विंध्य एक्सप्रेसवे समेत चार परियोजनाओं को हरी झंडी

विंध्य एक्सप्रेसवे समेत चार परियोजनाओं को हरी झंडी
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Ayaan Khan

Ayaan Khan

0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Anjali Patil

Anjali Patil

0 सेकंड पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

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47 हजार करोड़ की एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मंजूरी
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर मुहर लगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित करना और औद्योगिक विकास को नई गति देना है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के कई पिछड़े और दूरदराज क्षेत्रों को तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। एक्सप्रेसवे नेटवर्क मजबूत होने से निवेश और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। यह फैसला उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में और मजबूत करेगा।


प्रयागराज से सोनभद्र तक बनेगा विंध्य एक्सप्रेसवे
कैबिनेट ने लगभग 333 किलोमीटर लंबे छह लेन के विंध्य एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस परियोजना पर करीब 26,315 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एक्सप्रेसवे प्रयागराज से शुरू होकर भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली होते हुए सोनभद्र तक पहुंचेगा। इसके बनने से प्रयागराज से सोनभद्र की यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा। यह मार्ग मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की सीमाओं तक बेहतर सड़क संपर्क भी उपलब्ध कराएगा। धार्मिक, औद्योगिक और पर्यटन गतिविधियों को भी इससे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।


विंध्य और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होंगे सीधे जुड़े
करीब 117 किलोमीटर लंबे विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 9,039 करोड़ रुपये है। यह मार्ग विंध्य एक्सप्रेसवे को गाजीपुर स्थित पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ेगा। इसके बनने से गंगा, विंध्य और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे आपस में जुड़कर एक विशाल एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार करेंगे। इससे दिल्ली से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार सीमा तक निर्बाध यात्रा संभव होगी। माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

 

आगरा, लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे का नेटवर्क होगा मजबूत
कैबिनेट ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक मार्ग में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लगभग 90.84 किलोमीटर लंबे नए लिंक एक्सप्रेसवे को भी स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना पर लगभग 7,488 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन लिंक मार्गों से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच तेज आवागमन संभव होगा। औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को इससे नई रफ्तार मिलेगी। प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और अधिक एकीकृत हो जाएगा।


उद्योग, निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
नई एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण नए औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा सकेंगे। परिवहन लागत कम होने से व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी फायदा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। परियोजनाएं पूरी होने के बाद भी उद्योग और सेवा क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य इन एक्सप्रेसवे के जरिए संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है। इससे विंध्य और पूर्वांचल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


36 महीने में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) इन सभी परियोजनाओं के निर्माण की जिम्मेदारी संभालेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी तेजी लाई जाएगी। सरकार ने निर्माण एजेंसियों के लिए 36 महीने में परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य तय किया है। समय पर निर्माण पूरा होने से प्रदेश के लाखों लोगों को तेज और सुरक्षित सड़क सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले वर्षों में प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को इससे नई दिशा मिलेगी।

 

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Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

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