Gyanesh Kumar Protest: प्रयागराज में ज्ञानेश कुमार के विरोध में मशाल मार्च

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Monika Das

Monika Das

0 सेकंड पहले

Pehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

0 सेकंड पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

0 सेकंड पहले

Nishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.

Ada khan

Ada khan

3 घंटे पहले

Yeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

4 घंटे पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर प्रयागराज में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वर्तमान और पूर्व छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला। इस दौरान पुलिस द्वारा मार्च को रोकने की कोशिश किए जाने पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। घटना के दौरान इलाके में तनाव और अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

 

चंद्रशेखर आजाद पार्क की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, छात्र संगठनों और युवा कार्यकर्ताओं ने हाथों में जलती मशालें और मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर मार्च निकाला। जुलूस को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात था। जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। मशालों से चिंगारियां उड़ने और कुछ वाहनों के गिरने की भी खबर सामने आई।

 

SIR प्रक्रिया पर सवाल, मतदाता सूची में नाम कटने का आरोप
प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। इसी आधार पर प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने तथा SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े ये आरोप प्रदर्शनकारी संगठनों के हैं।

 

सपा का ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ मार्च, पुतला दहन के दौरान झड़प
प्रयागराज में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत मार्च निकाला। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाने की कोशिश के समय एक स्थान पर पुलिसकर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच पुतला छीनने को लेकर झड़प होने की जानकारी सामने आई। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

 

कांग्रेस, छात्र संगठनों और अधिवक्ताओं ने भी उठाई आवाज
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, आइसा (AISA), दिशा छात्र संगठन, अधिवक्ताओं और अन्य सामाजिक संगठनों के शामिल होने की खबरें हैं। इन संगठनों ने अलग-अलग स्थानों पर मशाल यात्रा, पैदल मार्च, धरना और पुतला दहन के माध्यम से अपनी मांगें रखीं। कुछ संगठनों ने जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल की जांच की मांग भी उठाई।

 

प्रमुख चौराहों पर सुरक्षा बढ़ी, यातायात भी प्रभावित
लगातार हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए प्रयागराज के प्रमुख इलाकों में पुलिस की सतर्कता बढ़ाई गई है। बालसन चौराहा, सुभाष चौराहा, बैंक रोड और अन्य प्रदर्शन स्थलों पर मार्च तथा धरने के कारण यातायात प्रभावित होने की जानकारी दी गई है। पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और भीड़ को नियंत्रित करना है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में प्रदर्शन से पहले छात्र नेताओं और छात्रों को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

 

मतदाता अधिकार और चुनावी पारदर्शिता बना विरोध का मुख्य मुद्दा
प्रयागराज में जारी विरोध प्रदर्शन अब केवल छात्र संगठनों तक सीमित नहीं रह गया है। राजनीतिक दलों, अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों ने भी मतदाता सूची की पारदर्शिता तथा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं, SIR को लेकर लगाए गए आरोपों और उससे जुड़े विवादों का निष्पक्ष आकलन संबंधित आधिकारिक तथ्यों और जांच के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
निष्कर्ष: प्रयागराज में मशाल मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की ने SIR को लेकर चल रहे विरोध को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन, चुनाव आयोग और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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Monika Das

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Pehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

0 सेकंड पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

0 सेकंड पहले

Nishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.

Ada khan

Ada khan

3 घंटे पहले

Yeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

4 घंटे पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

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