महाराष्ट्र में UCC की तैयारी तेज: रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनेगा महाराष्ट्र का UCC ड्राफ्ट

रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनेगा महाराष्ट्र का UCC ड्राफ्ट
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Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

0 सेकंड पहले

Yeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!

Kavya Mishra

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0 सेकंड पहले

Pehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!

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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि समिति राज्य के नागरिकों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून का प्रारूप तैयार करेगी।


पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई होंगी अध्यक्ष
सरकार ने इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी है। जस्टिस देसाई इससे पहले उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने वाली समिति का भी नेतृत्व कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में समिति विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।


समिति में कानून और प्रशासन के विशेषज्ञ शामिल
सात सदस्यीय समिति में पूर्व बॉम्बे हाईकोर्ट न्यायाधीश जस्टिस आर. सी. चव्हाण और जस्टिस एस. जी. मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डी. के. जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, संवैधानिक विशेषज्ञ रमेश पाटांगे तथा शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णा रावल को सदस्य बनाया गया है। समिति विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन करेगी।

 

 छह महीने में तैयार होगी ड्राफ्ट रिपोर्ट
राज्य सरकार ने समिति को छह महीने के भीतर अपनी विस्तृत ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित विधेयक का मसौदा तैयार करेगी।


शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने की तैयारी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने संकेत दिए हैं कि यदि समिति समय पर अपनी रिपोर्ट सौंपती है, तो सरकार नागपुर में होने वाले राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में UCC से संबंधित विधेयक पेश करने का प्रयास करेगी। हालांकि अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों और विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।


अनुच्छेद 44 के तहत पहल
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पहल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy) के अनुरूप की जा रही है। सरकार का कहना है कि उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता और कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करने की दिशा में विचार-विमर्श करना है।

 

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