मोदी के फर्जी AI वीडियो पर बड़ी पुलिस कार्रवाई: PM मोदी डीपफेक केस में Meta इंडिया हेड पर FIR

Sneha Menon
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Arjun Singh
25 मिनट पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Myra Dubey
27 मिनट पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Tanya Bajaj
27 मिनट पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Neha Tripathi
32 मिनट पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Nidhi kumari
35 मिनट पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Anil Sen
39 मिनट पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Nisha Shah
47 मिनट पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Trapti Tanwar
53 मिनट पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Ritika Ghosh
1 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Ritika Ghosh
1 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Sai Mehta
1 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Vivaan Gupta
1 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Harsh Pandya
2 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Shruti Bajpai
2 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Taushif Shekh
2 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Aarav Sharma
2 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Vihaan Patel
3 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Shruti Bajpai
3 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Harsh Pandya
3 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Anjali Patil
4 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Aditya Verma
4 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Riya Jain
4 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Aditya Verma
5 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Taushif Shekh
5 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Rohan Desai
5 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Myra Dubey
6 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथित एआई-निर्मित डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास सहित कई सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब वीडियो के स्रोत और प्रसार की पूरी कड़ी तलाश रही हैं।
AI से तैयार किया गया कथित फर्जी वीडियो
प्रारंभिक जांच के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथित डीपफेक वीडियो प्रसारित किया गया था। वीडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से मॉर्फ कर आपत्तिजनक रूप में प्रस्तुत किए जाने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
Meta इंडिया प्रमुख बने सह-आरोपी
एफआईआर में मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास को सह-आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर प्रसारित भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री को समय रहते हटाने और उसके प्रसार को रोकने में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस उन अकाउंट्स की भी जांच कर रही है जिन्होंने वीडियो को अपलोड, शेयर या व्यापक रूप से प्रसारित किया।
BNS और IT Act की धाराओं में दर्ज मामला
पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज किया है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि वीडियो किसने तैयार किया, किन माध्यमों से प्रसारित हुआ और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था। जरूरत पड़ने पर संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म से तकनीकी जानकारी भी मांगी जाएगी।
डीपफेक तकनीक पर बढ़ी चिंता
इस घटना ने एक बार फिर एआई आधारित डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्जी वीडियो जनमानस को भ्रमित कर सकते हैं और सामाजिक तथा राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जांच जारी, आगे हो सकती है सख्त कार्रवाई
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल फोरेंसिक जांच, सर्वर लॉग और सोशल मीडिया रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बिना सत्यापन किसी भी संदिग्ध वीडियो या सामग्री को साझा न करें।








