मोहन सरकार का बड़ा फैसला, लिव-इन पर कानून सख्त: मध्य प्रदेश में लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

Anika Rajput
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Ada khan
0 सेकंड पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में समान नागरिक संहिता (UCC) के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
लिव-इन में रहना है तो 30 दिन में कराना होगा रजिस्ट्रेशन
नए प्रावधानों के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने की शुरुआत के 30 दिनों के भीतर जिला रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यदि रिश्ता समाप्त होता है तो इसकी सूचना भी रजिस्ट्रार को देनी होगी। बिना रजिस्ट्रेशन निर्धारित अवधि से अधिक साथ रहने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान
कानून के तहत एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 3 महीने तक की जेल या ₹10,000 तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। रजिस्ट्रार के नोटिस के बावजूद जानकारी न देने पर 6 महीने तक की जेल और ₹25,000 तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
21 साल से कम उम्र वालों के लिए विशेष नियम
यदि लिव-इन रिलेशनशिप में शामिल किसी भी व्यक्ति की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावकों को इसकी सूचना देगा। साथ ही, लिव-इन संबंध समाप्त होने की जानकारी भी अभिभावकों तक पहुंचाई जाएगी। स्थानीय पुलिस थाने के पास भी रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
महिलाओं और बच्चों को मिले मजबूत कानूनी अधिकार
नए कानून में महिलाओं को विशेष संरक्षण दिया गया है। यदि पुरुष साथी महिला को छोड़ देता है, तो महिला अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का दावा कर सकेगी। वहीं, लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को पूरी कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार प्राप्त होगा।
अनुसूचित जनजाति को छूट, चौथा UCC राज्य बना MP
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून पारदर्शिता, कानूनी सुरक्षा और सामाजिक जवाबदेही को मजबूत करेगा।







