Iran US tensions: अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकर किए तबाह

Anjali Patil
10 घंटे पहलेHum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.
Pranav Srivastava
11 घंटे पहलेYeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.
Aditya Verma
14 घंटे पहलेInternational politics bahut tezi se badal rahi hai.
Krishna Yadav
15 घंटे पहलेIndia ka is maamle mein kya role hoga?
Dev Kapoor
16 घंटे पहलेIs khabar ka asar kai deshon par padega.
Tanya Bajaj
18 घंटे पहलेWorld leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच कच्चे तेल के टैंकरों को निशाना बनाकर उन्हें संचालन के अयोग्य कर दिया। अमेरिकी सेना ने यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश के बाद की। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक युद्धपोत इन हमलों से बच गया और किसी अमेरिकी कर्मी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अमेरिकी कार्रवाई में M/T Kaviz, M/T Charminar, M/T Horizon 1, M/T Riesco और M/T Derya को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
मिसाइल हमलों के जवाब में अमेरिका की कार्रवाई
अमेरिकी सेना ने पांच टैंकरों पर कार्रवाई को ईरान की ओर से अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर किए गए कथित बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। CENTCOM के अनुसार IRGC ने दो दिनों के भीतर अमेरिकी युद्धपोत को दो बार निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी जहाज हमलों से बचने में सफल रहा। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया और कार्रवाई से पहले उनके क्रू को जहाज खाली करने की चेतावनी दी गई। अमेरिकी पक्ष के अनुसार इस कार्रवाई में अमेरिकी कर्मियों के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ऊर्जा और समुद्री व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकाने भी सीधे निशाने पर आ रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा तनाव का केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र बन गया है। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है और यहां बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका इस क्षेत्र में सीमित समुद्री आवाजाही को सुरक्षा देने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान ने भी जलडमरूमध्य में जहाजों पर कार्रवाई के दावे किए हैं। रॉयटर्स के अनुसार बुधवार को खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कई व्यापारिक जहाजों को सैन्य गतिविधियों के बीच नुकसान पहुंचने की खबर आई, हालांकि तत्काल किसी बड़े जनहानि की पुष्टि नहीं हुई। इससे साफ है कि होर्मुज में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बड़ा जोखिम बनता जा रहा है।
ईरान का पलटवार, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर मिसाइल हमला
अमेरिका की ओर से पांच तेल टैंकरों पर कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड के अनुसार उसने जॉर्डन में अमेरिकी इस्तेमाल वाले अल-अज्राक एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया और क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों तथा अन्य टैंकरों पर भी हमले किए। हालांकि ईरान के कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जॉर्डन की सेना ने बताया कि ईरान की ओर से दागी गई 20 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 18 को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रोक दिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी रहित इलाकों में गिरीं और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी गई। इस जवाबी कार्रवाई से संघर्ष के और व्यापक क्षेत्र में फैलने की आशंका बढ़ गई है।
तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर का खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। मध्य-पूर्व में तेल टैंकरों और समुद्री मार्गों पर हमलों की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत बुधवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई और कुछ कारोबार में यह स्तर पार भी कर गई। होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और परिवहन लागत पर असर पड़ने की आशंका है। ऊर्जा कीमतों में तेजी का प्रभाव भारत समेत तेल आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष को अब केवल सैन्य संकट नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक जोखिम के रूप में भी देखा जा रहा है।
छह महीने पुराने संघर्ष में फिर बढ़ी युद्ध की आग
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब छह महीने से ज्यादा समय से जारी है और हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। अमेरिकी तेल टैंकरों पर कार्रवाई, ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों और जहाजों पर जवाबी हमलों के दावे तथा होर्मुज में व्यापारिक जहाजों को नुकसान पहुंचने की खबरों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित किया है। इस टकराव में अब सैन्य ठिकानों के साथ ऊर्जा और समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण रास्ते भी प्रभावित हो रहे हैं। यदि दोनों देशों के बीच हमलों का यह सिलसिला आगे बढ़ता है तो खाड़ी क्षेत्र के अन्य देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि अमेरिका-ईरान का यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई से आगे बढ़कर व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप न ले ले।








